काश के तुम आ जाओ
दिल कहता है कि काश तुम आ जाओ
इस कोरी रात में
मेरी तनहाइयों की उबासियाँ बांटने
बांटने कोरे गीत, कोरी थकान
दिल कहता है के तुम आ जाओ
जैसे प्रेम की पहली मुस्कान
आ जाओ बच्चे की पहली किलकारी से
बेमतलब, बेसबब
आ जाओ यूँ ही देखने के
कैसी लगती हूँ में अब ?
कैसे लेती हूँ तुम्हारा नाम ?
पता नहीं कितनी झुर्रियां
हमने बाँट ली हैं साथ?
काश के तुम आ जाओ
देखने के कितने फूल उग आये हैं
उस कच्चे रस्ते पर
जहाँ तुम आना पक्का कर गए थे |
आ जाओ देखने मेरा घर
जहाँ तुम्हारे नाम की कोई चीज़ नहीं
मेरे अलावा |
आओ देखने चमकती रोशनियाँ आँगन में मेरे
और अँधेरे बांटने आ जाओ भीतर नाचते
तुम्हारी पलक जो अब मेरे पसंदीदा रंग की हो गयी होगी
उनमें पढना चाहती हूँ अपनी यादों की नमियां
और वो कई साल जब तुमने मुझे पुकारा होगा
क्या चश्मा पहने हो तुम अब ?
शायद देख पो अब मुझे ठीक से
अब मुझे खाना पकाना अच्छा नहीं लगता
तुम सीख पाए कुछ पकाना ?
जब कभी टेलीफोन खराब हो जाता था
सोचती थी के तुम आ जाओगे।
तुम्हारे ख्याल जैसे गुनगुने पानी में
थक चुके पैर
और यादें है मासिक धर्म सी
अब आ भी जाओ
गुलाब चुन रखे हैं मैंने
पीले
तुम ले जाओ
अपनी हरी वर्दी की जेब पर लगाना
और ले जाओ वो चिट्ठियाँ भी
जो मैंने कई बार भेजीं
पर लौट आयीं |
-Ⓒविजया
दिल कहता है कि काश तुम आ जाओ
इस कोरी रात में
मेरी तनहाइयों की उबासियाँ बांटने
बांटने कोरे गीत, कोरी थकान
दिल कहता है के तुम आ जाओ
जैसे प्रेम की पहली मुस्कान
आ जाओ बच्चे की पहली किलकारी से
बेमतलब, बेसबब
आ जाओ यूँ ही देखने के
कैसी लगती हूँ में अब ?
कैसे लेती हूँ तुम्हारा नाम ?
पता नहीं कितनी झुर्रियां
हमने बाँट ली हैं साथ?
काश के तुम आ जाओ
देखने के कितने फूल उग आये हैं
उस कच्चे रस्ते पर
जहाँ तुम आना पक्का कर गए थे |
आ जाओ देखने मेरा घर
जहाँ तुम्हारे नाम की कोई चीज़ नहीं
मेरे अलावा |
आओ देखने चमकती रोशनियाँ आँगन में मेरे
और अँधेरे बांटने आ जाओ भीतर नाचते
तुम्हारी पलक जो अब मेरे पसंदीदा रंग की हो गयी होगी
उनमें पढना चाहती हूँ अपनी यादों की नमियां
और वो कई साल जब तुमने मुझे पुकारा होगा
क्या चश्मा पहने हो तुम अब ?
शायद देख पो अब मुझे ठीक से
अब मुझे खाना पकाना अच्छा नहीं लगता
तुम सीख पाए कुछ पकाना ?
जब कभी टेलीफोन खराब हो जाता था
सोचती थी के तुम आ जाओगे।
तुम्हारे ख्याल जैसे गुनगुने पानी में
थक चुके पैर
और यादें है मासिक धर्म सी
अब आ भी जाओ
गुलाब चुन रखे हैं मैंने
पीले
तुम ले जाओ
अपनी हरी वर्दी की जेब पर लगाना
और ले जाओ वो चिट्ठियाँ भी
जो मैंने कई बार भेजीं
पर लौट आयीं |
-Ⓒविजया
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